हनुमान प्रसाद यादव/एमसीबी –
जिले के जनपद पंचायत भरतपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत नेरूआ सचिव पर लगे ग्राम पंचायत धनराशि एवं पंचायत के लजर व्यवस्था को लेकर कई गंभीर आरोप। पंच सरपंच कहना है कि पंचायत व्यवस्था पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता ना ही ग्राम सभा आदि जैसे बैठक किया जाता है। जिससे पंचायत के विकास कार्य एवं ग्रामीणों का समस्या का समाधान सुचारू रूप से नहीं हो पाता है। सचिन के लापरवाही से ग्रामीण परेशान रहते हैं। जिसकी शिकायत जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को लिखित आवेदन पत्र में सचिव के कार्य शैली का जिक्र करते हुए कार्यवाही कर ग्राम पंचायत नेरूआ से हटाए जाने का उल्लेख की गई है। परंतु उच्च अधिकारियों द्वारा अभी तक पंचायत प्रतिनिधियों के आवेदन पर कोई कार्यवाही नहीं की गई है। प्रशासनिक चुप़्पी पर कई सवाल उठ रहे हैं। क्या प्रशासनिक संरक्षण से पंचायत सचिव कर रहा है अनियमितताएं। जिससे कार्यवाही करने में कतरा रहें हैं।
पंचायत प्रतिनिधियों ने कलेक्टर को सौपें विस्तृत आवेदन में गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि ग्राम पंचायत के सचिव ने ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों से तालुकात न रखते हुए अपने मनमाने ढंग से कार्य किया जाता है। बिंदुओं पर अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है,परंतु आज तक न कोई जांच, ना ही कोई कार्यवाही की गई है ।

पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि गांव में बढ़ता आक्रोश जांच नहीं तो आंदोलन अब यह मामला केवल शिकायत तक सीमित नहीं रहा बल्कि जन आक्रोश का रूप लेता जा रहा है ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही निष्पक्ष जांच और सचिव को नहीं हटाई गई तो वे आंदोलन और धरना प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। पंचायत प्रतिनिधियों ने यह भी आरोप लगाया है कि पंचायत में लंबे समय से विकास कार्यों के नाम पर कागजी खेल चल रहा है लेकिन अब पानी सर से ऊपर हो चुका है।
मामला-क्या होगी निष्पक्ष जांच या फिर फाइल में दब जाएगा मामला? इस पूरे प्रकरण ने पंचायत स्तर पर चल रहे विकास योजनाओं की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन इस मामले में स्वतंत्र तकनीकी और वित्तीय जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करेगी या फिर यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दब कर रह जाएगा।







