लक्ष्मी नारायण लहरे/सारंगढ़। जिला मुख्यालय सारंगढ़ के सांस्कृतिक नगरी कोसीर में आस्था की एक अनोखी मिसाल देखने को मिलती है। यहां स्वर्गीय चोहराम बनज के घर में पिछले 53 वर्षों से लगातार भगवान गणेश की स्थापना हो रही है, और इसकी शुरुआत उनके पुत्र के जन्म के साथ हुई थी।
पुत्र जन्म से शुरू हुई परंपरा, आज स्वर्णिम पड़ाव पर
यह कहानी है स्व. चोहराम बनज के पुत्र पोलेश्वर कुमार बनज की। परिवार के अनुसार, जिस वर्ष पोलेश्वर कुमार का जन्म हुआ, उसी वर्ष से घर में गणपति बप्पा की स्थापना शुरू की गई थी।
पोलेश्वर बनज बताते हैं — “पिताजी स्वर्गीय चोहराम बनज ने मेरे जन्म के अवसर पर ही घर में गणेश जी की मूर्ति स्थापित करने का संकल्प लिया था। तब से आज तक 53 साल हो गए, एक भी साल ऐसा नहीं गया जब बप्पा हमारे घर न विराजे हों। पिताजी तो अब नहीं रहे, पर उनकी शुरू की हुई यह परंपरा मैं और मेरा परिवार उसी श्रद्धा से निभा रहे हैं।”
आज यह परिवार अपने गणेश उत्सव के 53वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है।
10 दिनों तक चलता है भक्ति और संस्कृति का संगम
बनज परिवार में गणेश उत्सव केवल मूर्ति स्थापना तक सीमित नहीं है। यहां पूरे दस दिनों तक विधि-विधान से पूजा-पाठ, रोजाना सुबह-शाम आरती, और रामायण पाठ का आयोजन होता है।
दसवें दिन विसर्जन के पूर्व पारंपरिक भोज-भंडारे की व्यवस्था रहती है, जिसमें पूरा मोहल्ला, रिश्तेदार और गांव के लोग शामिल होते हैं। इको-फ्रेंडली मिट्टी के गणेश जी, फूलों से सजी झांकी और रामायण की चौपाइयां पूरे कोसीर में भक्ति का माहौल बना देती हैं।
संयुक्त परिवार की मिसाल
बप्पा के बहाने बाहर नौकरी और पढ़ाई के लिए गए परिवार के सभी सदस्य इन 10 दिनों में घर लौट आते हैं। यह उत्सव इस परिवार को एक सूत्र में बांधे हुए है।
कोसीर जैसे सांस्कृतिक नगर में बनज परिवार की यह 53 साल पुरानी परंपरा आज भी लोगों के लिए प्रेरणा बनी हुई है।







