Home चर्चा में एलआईसी मंडल कार्यालय में हिंदी पखवाड़े पर कवि सम्मेलन संपन्न ….

एलआईसी मंडल कार्यालय में हिंदी पखवाड़े पर कवि सम्मेलन संपन्न ….

11
0

लक्ष्मी नारायण लहरे/रायपुर। जीवन बीमा निगम मंडल कार्यालय, पंडरी रायपुर में हिंदी पखवाड़ा के समापन अवसर पर भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में साहित्य सृजन संस्थान रायपुर के कवियों ने अपनी रचनाओं से समां बांधा । कवयित्री डॉ. अर्चना पाठक “निरंतर”, शायर जावेद नदीम “नागपुरी”, यशवंत कुमार चतुर्वेदी, डॉ. लक्ष्मीकांत पण्डा ने काव्य पाठ किया, जबकि कार्यक्रम का सफल संचालन श्रीमती अर्पणा सिंह “अर्पी” ने किया।

कवियों की प्रस्तुतियां:
डॉ. अर्चना पाठक “निरंतर” ने कहा –
हस्ताक्षर हिंदी करें, हिंदी में हो काज।
अपनी भाषा बोल लो, इसमें क्या है लाज।।
छंद गीत श्रृंगार सब, हिन्दी की पहचान।
सीधी सादी है बहुत, सदा बढ़ती मान।।

पहले तो ख़्वाहिशों को बढ़ाती है ज़िंदगी।
फिर उसके बाद खूब लड़ाती है ज़िंदगी।
दो रोटियों के फ़िक्र में कितनों को आज तक,
जाने कहाँ-कहाँ पर नचाती है ज़िंदगी।
मर कर तो एक बार ही जलता है आदमी,
जीवन में बार-बार जलाती है ज़िंदगी।।

डॉ. लक्ष्मीकांत पण्डा ने सुनाया –
ये जीवन गणित से संभलता नहीं
इतना गणित में न उलझो सुनो
लहरों में बहती नदी की तरह
ज़रा प्यार लेकर बहो तो चलो।

शायर जावेद नदीम “नागपुरी” की ग़ज़ल –
चिंताओं का सागर गहरा जीवन नाव पुरानी है
सुख के तट तक कैसे पहुंचू चारों ओर तो पानी है,
मुझ पर पत्थर फेंक रहे हैं कैसे कैसे महा पुरुष
पागल हूं तो मेरे पीछे दुनिया क्यूं दीवानी है
बूढ़ा बरगद ढूंढ रहा है, आशाओं के दीप लिए अपने बीते बचपन के दिन ये उसकी नादानी है

यशवंत कुमार चतुर्वेदी ने राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत रचना पढ़ी –
अंतस में हो भारत, भारती
रंग तिरंगा तन-मन-प्रण, जन में
हो “वंदे मातरम्” संकल्प मंत्र
भारत के जन-गण-मन, जीवन में

अर्पणा सिंह “अर्पी” ने कहा –
बहन उर्दू की देखो भाल की बिंदी है ये हिंदी।
सभी भाषाओं की पहली सुबह औ शाम है हिंदी।
जनम जब से लिया बोली तभी से प्यार की भाषा।
तुम्हें शायद पता होगा कि उसका नाम है हिंदी

इस अवसर पर मंडल प्रबंधक श्री अमित श्रीवास्तव, प्रशासनिक अधिकारी एवं हिंदी राजभाषा अधिकारी सर्वश्री आलोक धुरिया, संदीप सोनी एवं श्रीमती एस.माधवी राव, सहायक मंडल प्रबंधक श्री गिरीश कुमार सिन्हा, अनुरोध शर्मा, साहित्य सृजन संस्थान के अध्यक्ष वरिष्ठ साहित्यकार वीर अजित शर्मा एवं एन जे राव, मोहन साहू, धर्मेंद्र यादव, सूरज दीप, दीपक जेम्स, जैकब सकारिया, राजेश बाघ, राजेश यादव, श्रीमती एन. ऊषा राव, श्रीमती प्रेरणा ठाकुर, श्रीमती सीमा वाढेर, श्रीमती अनुपमा कैमरो, श्रीमती हेमलता केशवानी, श्रीमती गायत्री दिनकर, श्रीमती रश्मि पॉल, श्रीमती संध्या राज इत्यादि उपस्थित रहे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here