रायपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षकों से जुड़ी महत्वपूर्ण मांगों पर बुधवार को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में कोई निर्णय नहीं लिए जाने से शिक्षक संगठनों में निराशा सामने आई है। शिक्षक संगठनों के अनुसार TET अनिवार्यता में राहत, पूर्व सेवा अवधि की गणना, पदोन्नति और वेतन विसंगति जैसे लंबे समय से लंबित विषयों पर कैबिनेट बैठक में कोई प्रस्ताव पारित नहीं किया गया।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि अगस्त और सितंबर माह के दौरान विभिन्न शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, डीपीआई सहित वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर इन मांगों को लेकर चर्चा की थी। संगठनों के अनुसार इन बैठकों में सकारात्मक चर्चा के साथ उन्हें मांगों पर उचित कार्रवाई का आश्वासन भी मिला था। ऐसे में कैबिनेट बैठक में इन विषयों पर निर्णय नहीं होने से शिक्षकों में निराशा है।
25-30 वर्षों के अनुभव के बावजूद TET में राहत नहीं
शिक्षक संगठनों ने कैबिनेट के उस निर्णय पर भी सवाल उठाया है, जिसमें अतिथि व्याख्याताओं के अनुभव को लेकर प्रावधान किए गए हैं। उनका कहना है कि एक ओर अतिथि व्याख्याताओं के अध्यापन अनुभव को महत्व देते हुए अनुभव अंक देने का निर्णय लिया गया है, वहीं दूसरी ओर 25 से 30 वर्षों का लंबा शैक्षणिक अनुभव रखने वाले शिक्षकों एवं सहायक शिक्षकों को TET अनिवार्यता से राहत नहीं दी गई है।
संगठनों का कहना है कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के अनुभव को ध्यान में रखते हुए TET सहित अन्य लंबित मांगों पर भी सरकार को स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए।
शिक्षक हित में ठोस निर्णय की मांग
संकुल समन्वयक शिक्षक संघ के कार्यकारी अध्यक्ष रामचंद्र सोनवंशी ने कहा कि शिक्षक समाज लंबे समय से TET में राहत, पूर्व सेवा अवधि की गणना, पदोन्नति और वेतन विसंगति जैसे विषयों को लेकर अपनी मांग रखता रहा है। इन मुद्दों पर समय रहते ठोस निर्णय नहीं होने से शिक्षकों में असंतोष बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि शिक्षक हितों से जुड़े इन विषयों पर जल्द सकारात्मक पहल की आवश्यकता है। यदि समय रहते मांगों पर निर्णय नहीं लिया गया, तो शिक्षक संगठनों को अपने अधिकारों के लिए आगे की रणनीति पर विचार करना पड़ेगा।







