Home कोरबा जनप्रतिनिधियों का समय बर्बाद, अधिकारी बेपरवाह! करतला जनपद की बैठक फिर स्थगित

जनप्रतिनिधियों का समय बर्बाद, अधिकारी बेपरवाह! करतला जनपद की बैठक फिर स्थगित

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-सीईओ के संज्ञान में चार बार मामला लाए जाने और हिदायत के बावजूद कई विभागों के अधिकारी नदारद; खाद्य एवं शिक्षा विभाग रहे मौजूद, जनपद अध्यक्ष-उपाध्यक्ष सहित सदस्यों ने जताई कड़ी नाराजगी

मोहन वैष्णव/करतला। जनपद पंचायत करतला की महत्वपूर्ण बैठक एक बार फिर कई विभागीय अधिकारियों की गैरमौजूदगी के कारण स्थगित करनी पड़ी। बैठक में जनपद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष सहित जनपद सदस्यों की पूर्ण उपस्थिति रही, लेकिन कई महत्वपूर्ण विभागों के अधिकारी मौजूद नहीं रहे। इसके चलते जनप्रतिनिधियों द्वारा क्षेत्र की जनता से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर संबंधित अधिकारियों से चर्चा और जवाब नहीं हो सका।

बताया जा रहा है कि अधिकारियों की बैठकों में अनुपस्थिति को लेकर पहले भी चार बार हिदायत दी जा चुकी है और मामला जनपद सीईओ के संज्ञान में भी लाया गया है। इसके बावजूद स्थिति में सुधार नहीं होने से जनप्रतिनिधियों में नाराजगी है।

जनप्रतिनिधि पहुंचे, कई अधिकारी रहे नदारद

जनपद पंचायत की बैठक में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों की उपस्थिति रही। जनप्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्र की जनता से जुड़ी समस्याओं और विकास कार्यों के मुद्दे लेकर पहुंचे थे। उम्मीद थी कि सभी संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहेंगे और विभागवार समस्याओं पर जानकारी देते हुए समाधान की दिशा में चर्चा होगी।

हालांकि बैठक में खाद्य एवं शिक्षा विभाग के अधिकारी मौजूद रहे, जबकि अन्य कई विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी अनुपस्थित बताए गए। ऐसे में संबंधित विभागों से जुड़े मुद्दों पर सीधे जवाब लेना संभव नहीं हो सका।

परिणामस्वरूप बैठक की कार्यवाही प्रभावित हुई और अंततः बैठक स्थगित करनी पड़ी।

चार बार हिदायत के बाद भी स्थिति जस की तस

अधिकारियों की गैरमौजूदगी को लेकर सबसे अहम बात यह है कि यह स्थिति नई नहीं बताई जा रही है। इससे पहले भी बैठकों में अधिकारियों की अनुपस्थिति को लेकर सवाल उठ चुके हैं। जनप्रतिनिधियों के अनुसार इस संबंध में चार बार हिदायत भी दी जा चुकी है।

इसके बावजूद यदि संबंधित अधिकारी बैठक में उपस्थित नहीं होते हैं तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि दिए गए निर्देशों का पालन क्यों नहीं हो रहा है।

जनप्रतिनिधियों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि जब विभागीय अधिकारियों की बैठक में उपस्थिति आवश्यक है और इस संबंध में बार-बार निर्देश दिए जा चुके हैं, तो गैरमौजूदगी की स्थिति में जवाबदेही क्यों तय नहीं की जा रही है।

सीईओ के संज्ञान में मामला, फिर भी सुधार क्यों नहीं?

बताया जा रहा है कि अधिकारियों की अनुपस्थिति का मामला जनपद सीईओ के संज्ञान में भी कई बार लाया जा चुका है। इसके बावजूद संबंधित विभागों के अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित नहीं हो पाना प्रशासनिक समन्वय पर सवाल खड़े करता है।

सवाल यह भी है कि यदि किसी अधिकारी के लिए बैठक में उपस्थित होना संभव नहीं था, तो क्या इसकी पूर्व सूचना दी गई थी? यदि अधिकारी स्वयं उपस्थित नहीं हो सकते थे, तो क्या उनकी ओर से किसी सक्षम प्रतिनिधि को बैठक में भेजा गया?

इन सवालों के जवाब इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि जनपद की बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़ी समस्याओं पर विभागीय अधिकारियों से सीधे जानकारी और कार्रवाई की अपेक्षा की जाती है।

जनपद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष सहित सदस्यों ने जताई नाराजगी

अधिकारियों की गैरमौजूदगी को लेकर जनपद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष सहित सदस्यों ने नाराजगी जताई। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि वे बैठक में अपनी निजी समस्याओं के लिए नहीं, बल्कि क्षेत्र की जनता की समस्याओं को लेकर पहुंचते हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, खाद्य वितरण, आवास, रोजगार और विभिन्न सरकारी योजनाओं से जुड़ी समस्याएं सामने आती रहती हैं। जनपद की बैठक इन समस्याओं को संबंधित विभागों के अधिकारियों के सामने रखने का महत्वपूर्ण मंच है।

ऐसे में जब संबंधित अधिकारी ही बैठक में मौजूद नहीं होंगे तो जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब कौन देगा, यह बड़ा सवाल है।

खाद्य एवं शिक्षा विभाग रहे मौजूद

बैठक में खाद्य, एवं शिक्षा विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। इन विभागों से संबंधित विषयों पर चर्चा का अवसर मिला। हालांकि अन्य विभागों के अधिकारियों की अनुपस्थिति के कारण उनसे जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर तत्काल चर्चा नहीं हो सकी।

जनपद क्षेत्र के विकास और ग्रामीणों की समस्याओं से जुड़े मामले किसी एक विभाग तक सीमित नहीं हैं। सड़क और निर्माण कार्य, बिजली, पेयजल, ग्रामीण विकास, रोजगार, महिला एवं बाल विकास, आवास सहित कई विषय अलग-अलग विभागों से जुड़े हैं।

ऐसे में संबंधित विभाग के अधिकारी बैठक में उपस्थित नहीं होते हैं तो उस विभाग से जुड़े सवालों पर तत्काल जानकारी और समाधान की दिशा में चर्चा मुश्किल हो जाती है।

क्या जनपद की बैठकें बन रही हैं महज औपचारिकता?

अधिकारियों की बार-बार गैरमौजूदगी ने जनपद की बैठकों की उपयोगिता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र से समय निकालकर बैठक में पहुंचते हैं और जनता से जुड़ी समस्याओं को सामने रखते हैं।

यदि बैठक में पर्याप्त विभागीय अधिकारी मौजूद नहीं रहते और कार्यवाही स्थगित करनी पड़ती है, तो इससे जनप्रतिनिधियों का समय प्रभावित होने के साथ-साथ जनता से जुड़े मुद्दों के समाधान की प्रक्रिया भी रुक जाती है।

ऐसे में सवाल उठता है कि यदि संबंधित अधिकारी बैठक में उपस्थित होकर जनप्रतिनिधियों के सवालों का जवाब नहीं देंगे, तो फिर ऐसी बैठकों का उद्देश्य किस तरह पूरा होगा?

जनता की समस्याओं का क्या होगा?

जनप्रतिनिधियों का कहना है कि ग्रामीणों द्वारा बताई गई समस्याओं को संबंधित विभाग तक पहुंचाना उनकी जिम्मेदारी है। लेकिन जब बैठक में संबंधित विभाग के अधिकारी ही उपलब्ध नहीं होंगे तो समस्याओं पर तत्काल चर्चा और जवाब की संभावना कम हो जाती है।

इसका असर उन ग्रामीणों पर पड़ता है जो अपनी समस्याओं के समाधान के लिए जनप्रतिनिधियों से उम्मीद लगाए रहते हैं।

अब सिर्फ हिदायत नहीं, जवाबदेही की मांग

चार बार हिदायत दिए जाने के बावजूद अधिकारियों की अनुपस्थिति का मुद्दा सामने आने के बाद अब केवल हिदायत देने के बजाय जवाबदेही तय करने की मांग उठ रही है।

जनप्रतिनिधियों की मांग है कि आगामी बैठकों में सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। यदि कोई अधिकारी अपरिहार्य कारणों से बैठक में उपस्थित नहीं हो सकता तो इसकी पूर्व सूचना देने के साथ सक्षम प्रतिनिधि को भेजने की व्यवस्था हो, ताकि बैठक की कार्यवाही प्रभावित न हो।

अगली बैठक पर टिकी नजर

बैठक स्थगित होने के बाद अब सबकी नजर अगली बैठक पर है। देखना होगा कि अगली बैठक में सभी संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित होते हैं या फिर एक बार फिर अधिकारियों की गैरमौजूदगी के कारण जनप्रतिनिधियों को निराश होना पड़ता है।

फिलहाल करतला जनपद की बैठक ने प्रशासनिक समन्वय और अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर जनप्रतिनिधि पूरी संख्या में बैठक में पहुंच रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई विभागों के अधिकारियों की अनुपस्थिति की बात सामने आ रही है।

सवाल सीधा है—जब जनता की समस्याओं पर चर्चा के लिए जनप्रतिनिधि मौजूद हैं, बैठक की सूचना संबंधित अधिकारियों को है और उनकी उपस्थिति को लेकर पहले भी हिदायत दी जा चुकी है, तो फिर बार-बार अधिकारी बैठक से अनुपस्थित क्यों हो रहे हैं? आखिर करतला जनपद की बैठकों में जवाबदेही कौन तय करेगा?

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