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जमीरा माइंस में सुरक्षा व्यवस्था की खुली पोल! बिना शेल्टर ब्लास्टिंग पर बड़ा सवाल, हाईवा से 300 मीटर दूरी का अधिकारी ने दिया तर्क

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बलरामपुर संवाददाता युसूफ खान
ब्लास्टिंग से लेकर पेयजल तक व्यवस्थाओं पर उठे सवाल, माइंस परिसर में खुलेआम घूमते मिले मवेशी; आखिर श्रमिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी?
जमीरा। सीएमडीसी (CMDC) की जमीरा माइंस में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। खदान में ब्लास्टिंग के दौरान श्रमिकों की सुरक्षा, सुरक्षित शेल्टर की उपलब्धता, मवेशियों की बेरोकटोक आवाजाही और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर जो स्थितियां सामने आई हैं, वे खदान प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा रही हैं। खनन जैसे जोखिमपूर्ण कार्य में यदि सुरक्षा इंतजामों में कमी है, तो इसका खामियाजा किसी भी समय श्रमिकों और आसपास के क्षेत्र को भुगतना पड़ सकता है।
मौके पर सामने आए दृश्यों में माइंस परिसर में मवेशियों की आवाजाही दिखाई दी। वहीं, श्रमिकों के लिए पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठे हैं। सबसे गंभीर मामला ब्लास्टिंग के दौरान सुरक्षा शेल्टर की व्यवस्था को लेकर सामने आया है।
बिना शेल्टर ब्लास्टिंग पर सवाल, अधिकारी ने बताया हाईवा से 300 मीटर दूरी का विकल्प
जमीरा माइंस में ब्लास्टिंग के दौरान श्रमिकों की सुरक्षा के लिए शेल्टर की व्यवस्था को लेकर जब CMDC के अधिकारी से फोन पर जानकारी मांगी गई, तो उन्होंने कहा कि यदि खदान में शेल्टर नहीं है, तो हाईवा से 300 मीटर की दूरी रखकर ब्लास्टिंग की जा सकती है।
अधिकारी के इस बयान ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर किस स्वीकृत सुरक्षा प्रक्रिया के तहत ब्लास्टिंग की जा रही है? क्या हाईवा से 300 मीटर की दूरी रखने मात्र से श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो जाती है? क्या ब्लास्टिंग के दौरान निर्धारित सुरक्षित स्थान, चेतावनी संकेत, क्षेत्र की घेराबंदी और अन्य आवश्यक सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन किया जा रहा है?
सवाल यह भी है कि यदि शेल्टर उपलब्ध नहीं है, तो ब्लास्टिंग के समय श्रमिकों को सुरक्षित रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था क्या है? संबंधित खनन एवं सुरक्षा विभाग को मौके का निरीक्षण कर यह स्पष्ट करना चाहिए कि ब्लास्टिंग की प्रक्रिया स्वीकृत सुरक्षा मानकों के अनुरूप है या नहीं।
माइंस परिसर में मवेशियों का जमावड़ा, सुरक्षा निगरानी पर गंभीर सवाल
एक ओर खदान में ब्लास्टिंग जैसी संवेदनशील गतिविधियां संचालित हो रही हैं, वहीं दूसरी ओर माइंस परिसर में मवेशियों की खुलेआम आवाजाही दिखाई देना सुरक्षा निगरानी की प्रभावशीलता पर सवाल खड़ा करता है।
आखिर खदान परिसर में मवेशी प्रवेश कैसे कर रहे हैं? क्या खदान की सीमाओं पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था है? क्या ब्लास्टिंग से पहले प्रभावित क्षेत्र को पूरी तरह खाली कराया जाता है? यदि खदान परिसर में ही पशुओं की आवाजाही पर नियंत्रण नहीं है, तो अन्य सुरक्षा इंतजामों की निगरानी किस स्तर पर हो रही होगी?
यह स्थिति केवल पशुओं की सुरक्षा का विषय नहीं, बल्कि पूरे खदान क्षेत्र की निगरानी व्यवस्था से जुड़ा गंभीर मामला है।
श्रमिकों को स्वच्छ पेयजल और विश्राम की सुविधा भी सवालों के घेरे में
खदान में काम करने वाले श्रमिकों के लिए स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता को लेकर भी सवाल सामने आए हैं। मौके पर पानी की उपलब्धता और व्यवस्था को लेकर चिंता जताई गई है।
खनन कार्य में लगे श्रमिकों को स्वच्छ पेयजल, विश्राम के लिए उचित स्थान और आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रबंधन की जिम्मेदारी है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि जमीरा माइंस में श्रमिकों के लिए पेयजल की क्या व्यवस्था है? पानी की गुणवत्ता की जांच होती है या नहीं? श्रमिकों को विश्राम के लिए उचित स्थान उपलब्ध कराया गया है या नहीं?
इन सभी बिंदुओं पर संबंधित प्रबंधन को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
CMDC अधिकारी दीपक गुप्ता के बयान के बाद भी कई सवाल अनुत्तरित
माइंस में सामने आ रही सुरक्षा संबंधी समस्याओं को लेकर CMDC अधिकारी दीपक गुप्ता से भी जानकारी मांगी गई। ब्लास्टिंग के दौरान शेल्टर की व्यवस्था के संबंध में अधिकारी की ओर से हाईवा से 300 मीटर दूरी रखने की बात कही गई। हालांकि, इस व्यवस्था का संबंधित सुरक्षा नियमों और स्वीकृत ब्लास्टिंग प्रक्रिया से क्या संबंध है, यह स्पष्ट होना बाकी है।
अब आवश्यकता है कि CMDC प्रबंधन ब्लास्टिंग की पूरी प्रक्रिया, श्रमिकों की सुरक्षा और मौके पर उपलब्ध सुविधाओं को लेकर आधिकारिक स्पष्…

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