टोक्यो। जापान के दक्षिण-पूर्वी तटीय इलाके में रविवार सुबह भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 6.0 मापी गई। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, भूकंप का केंद्र जापान के मी प्रांत के शिमा शहर से करीब 58 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में समुद्र के भीतर था। इसकी गहराई जमीन से लगभग 352.4 किलोमीटर नीचे दर्ज की गई।
भूकंप का समय भारतीय समयानुसार रविवार, 1 नवंबर को सुबह करीब 3 बजकर 45 मिनट बताया गया है। वहीं, स्थानीय समय के अनुसार जापान में सुबह 7 बजकर 15 मिनट पर धरती में कंपन दर्ज किया गया। इसकी पुष्टि अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के भूकंप निगरानी नेटवर्क ने की है।
सुनामी को लेकर जारी नहीं हुई चेतावनी
भूकंप के बाद सबसे बड़ी राहत की बात यह रही कि समुद्र में किसी तरह की सुनामी की चेतावनी जारी नहीं की गई। उपलब्ध शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इस भूकंप के कारण समुद्र में सुनामी पैदा होने का खतरा नहीं बताया गया है।
जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) की ओर से भी सुनामी का अलर्ट जारी नहीं किया गया। हालांकि, समुद्री और भूकंपीय गतिविधियों पर निगरानी रखी जा रही है।
352 किलोमीटर की गहराई में था भूकंप का केंद्र
इस भूकंप की एक महत्वपूर्ण विशेषता इसकी गहराई रही। आमतौर पर कम गहराई पर आने वाले भूकंप सतह पर ज्यादा नुकसान पहुंचा सकते हैं, जबकि अधिक गहराई में उत्पन्न होने वाले भूकंपों का प्रभाव अलग-अलग क्षेत्रों में महसूस हो सकता है।
इस घटना का केंद्र समुद्र की सतह से लगभग 352 किलोमीटर नीचे था। इसी वजह से इतनी तीव्रता के बावजूद सतह पर कंपन का प्रभाव सीमित रहने का अनुमान लगाया गया है।
मी और आइची प्रांत में दर्ज हुई हलचल
भूकंप के बाद जापान के मी और आइची प्रांत के कुछ हिस्सों में हल्के झटके दर्ज किए गए। उपलब्ध भूकंपीय आंकड़ों के अनुसार, कंपन की अधिकतम अनुमानित तीव्रता मर्केली स्केल पर लगभग III रही, जिसे हल्की श्रेणी में रखा जाता है।
शुरुआती रिपोर्टों में बड़े पैमाने पर जान-माल के नुकसान या किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, स्थानीय प्रशासन और संबंधित एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
भूकंप के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र है जापान
जापान दुनिया के सबसे अधिक भूकंप प्रभावित देशों में शामिल है। इसकी भौगोलिक स्थिति प्रशांत महासागर के आसपास सक्रिय टेक्टोनिक प्लेटों के क्षेत्र में होने के कारण यहां समय-समय पर भूकंप आते रहते हैं।
जापान में भूकंप से निपटने के लिए आधुनिक निगरानी प्रणाली, भूकंपरोधी इमारतों और आपदा प्रबंधन की विशेष व्यवस्था विकसित की गई है। इसके बावजूद समुद्र के भीतर आने वाले भूकंपों पर विशेष सतर्कता बरती जाती है, क्योंकि कुछ परिस्थितियों में ऐसे भूकंप सुनामी का कारण बन सकते हैं।
फिलहाल 6.0 तीव्रता के इस भूकंप के बाद सुनामी का खतरा नहीं बताया गया है और किसी बड़े नुकसान की आधिकारिक पुष्टि भी सामने नहीं आई है।







