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21 गांवों के हक की हुंकार, वनांचल की अनदेखी पर चंद्रदेव राय का सरकार को अल्टीमेटम

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सारंगढ़ संवाददाता – अशोक मनहर
सड़क, बिजली और वन अधिकार पट्टे के लिए ग्रामीणों का अनिश्चितकालीन धरना; पूर्व संसदीय सचिव ने दिया समर्थन, मांगें नहीं मानीं तो मुख्यमंत्री निवास तक पैदल मार्च का ऐलान
रवान–बारनवापारा। वनांचल की दुर्गम पगडंडियों पर बसे 21 गांवों के ग्रामीण आज भी बुनियादी सुविधाओं की बाट जोह रहे हैं। कहीं सड़क नहीं, कहीं बिजली की रोशनी नहीं, तो कहीं वर्षों से वन अधिकार पट्टे का इंतजार खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। विकास की मुख्यधारा से जुड़ने की उम्मीद लगाए बैठे ग्रामीण अब अपने हक और अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इन्हीं मांगों को लेकर जारी अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन को समर्थन देने पूर्व विधायक एवं पूर्व संसदीय सचिव चंद्रदेव राय आंदोलन स्थल पहुंचे और ग्रामीणों के संघर्ष में साथ खड़े होने का भरोसा दिलाया।
धरना स्थल पर ग्रामीणों के बीच पहुंचे चंद्रदेव राय ने कहा कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष की नहीं, बल्कि 21 गांवों के हजारों लोगों के अधिकार, सम्मान और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की लड़ाई है। उन्होंने ग्रामीणों की मांगों को जायज बताते हुए राज्य सरकार से वनांचल की समस्याओं को गंभीरता से लेने और लंबित विकास कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूरा कराने की मांग की।
अपने कार्यकाल में वनांचल को विकास से जोड़ने का किया प्रयास
चंद्रदेव राय ने अपने विधायक एवं संसदीय सचिव के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए बताया कि क्षेत्र की जरूरतों को ध्यान में रखकर कई महत्वपूर्ण विकास कार्यों को स्वीकृति दिलाई गई और धरातल पर उतारा गया। बया में जिला सहकारी बैंक खुलवाने के साथ बार और मोहदा जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में सहकारी समितियां एवं धान उपार्जन केंद्र शुरू कराए गए। बारनवापारा क्षेत्र को नेटवर्क टावर के माध्यम से दूरसंचार सुविधा से जोड़ा गया।
उन्होंने बताया कि सोनाखान, गिरौदपुरी एवं टुंडरा को तहसील तथा गिरौदपुरी को एसडीएम कार्यालय की सौगात मिली। इसके अलावा बीएससी एवं एमएससी कॉलेज, अंग्रेजी माध्यम स्कूल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सहित अनेक महत्वपूर्ण कार्यों को स्वीकृति दिलाई गई। गांवों में पानी की टंकियां, सामाजिक भवन, रंगमंच, मुक्तिधाम, सार्वजनिक शौचालय, यात्री प्रतीक्षालय, सीसी रोड, नाली, सोलर लाइट, गौठान और रपटा निर्माण जैसे कार्य भी कराए गए। कंतरा नाला में वृहद पुल निर्माण को भी क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
स्वीकृत सड़कें अधूरी, बिजली की योजनाएं ठप होने से बढ़ी नाराजगी
वर्तमान स्थिति पर चिंता जताते हुए राय ने कहा कि वनांचल क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण विकास कार्य अब तक लंबित हैं। गिरौदपुरी से महाराजी-बया होते हुए पिथौरा मार्ग, बया से बारनवापारा होते हुए रायतुम पहुंच मार्ग, तुरतुरिया होते हुए कसडोल मार्ग तथा बिलाईगढ़ से सल्हिया होते हुए बेलारी-सांकरा पहुंच मार्ग जैसी पूर्व में स्वीकृत सड़कों का निर्माण शुरू नहीं होना क्षेत्रवासियों के लिए चिंता का विषय है।
इसके अलावा बिजली पहुंचाने की पूर्व प्रस्तावित योजनाओं और सोलर लाइट कार्यों के रुकने से भी ग्रामीणों में असंतोष है। उनका कहना था कि सड़क और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में वनांचल के लोगों को आज भी रोजमर्रा की जिंदगी में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
मुख्यमंत्री निवास तक पैदल मार्च का ऐलान, 21 गांवों ने दिया समर्थन
धरना स्थल से चंद्रदेव राय ने राज्य सरकार से मांग की कि सभी लंबित विकास कार्यों को शीघ्र प्रारंभ कराया जाए। वनांचल के गांवों में बिजली और पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए तथा वर्षों से लंबित पात्र हितग्राहियों के वन अधिकार पट्टों का वितरण किया जाए।
उन्होंने राज्य सरकार पर वनांचल क्षेत्र की उपेक्षा करने तथा गरीब, आदिवासी, अनुसूचित, पिछड़े एवं वंचित ग्रामीणों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विकास का अधिकार केवल शहरों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। जंगल और पहाड़ों के बीच रहने वाले लोगों को भी सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य और सम्मानपूर्वक जीवन जीने की सुविधाएं मिलनी चाहिए।
राय ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ग्रामीणों की जायज मांगों का शीघ्र निराकरण नहीं करती है तो वे ग्रामीणों के साथ रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास तक पैदल मार्च करेंगे। इस आह्वान पर धरना स्थल पर मौजूद 21 गांवों के ग्रामीणों ने हाथ उठाकर आंदोलन को अपना समर्थन दिया।
ग्रामीणों की एकजुटता बनी आंदोलन की ताकत
धरना प्रदर्शन में सैकड़ों की संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से संजू ठाकुर, सुरेश यादव, हेमंत दुबे, सिद्धांत मिश्रा, दीपक साहू, हेम कुमार दीवान, संतोष ठाकुर, संतोष यादव, ईश्वर साहू, परदेशी राम सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी शामिल हुए।
वनांचल के ग्रामीणों की मांग अब केवल सुविधाओं तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह वर्षों से लंबित अधिकारों और विकास में समान भागीदारी का सवाल बन चुकी है। धरना स्थल से उठी यह आवाज अब सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती के रूप में खड़ी है। ग्रामीणों को इंतजार है कि उनकी मांगों पर आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर काम शुरू होने की पहल दिखाई दे।

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