नितेश अधिकारी/गीदम। 8 अक्टूबर 2026
कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी सुखदेव भगत के दंतेवाड़ा प्रवास के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं ने स्वागत में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। उनके आगमन को लेकर कुछ स्थानों पर कार्यकर्ताओं में उत्साह भी दिखाई दिया, लेकिन इस पूरे कार्यक्रम में कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान और गुटबाजी भी साफ तौर पर नजर आई।
प्रदेश प्रभारी के सामने अपनी ताकत दिखाने की कोशिश में कांग्रेस के अलग-अलग नेताओं के समर्थक अलग-अलग समूहों में नजर आए। रैली के दौरान कुछ नेता अपने समर्थकों के साथ आगे चलते दिखाई दिए, जबकि पीछे चल रहे कार्यकर्ता अपने-अपने नेताओं के समर्थन में नारे लगाते रहे। इससे यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या दंतेवाड़ा कांग्रेस वास्तव में एकजुट है या फिर अलग-अलग गुटों में बंटी हुई है?
दंतेवाड़ा में कांग्रेस संगठन लंबे समय से सक्रियता के संकट से जूझता नजर आ रहा है। ऐसे में प्रदेश प्रभारी सुखदेव भगत के सामने सबसे बड़ी चुनौती कार्यकर्ताओं की भीड़ जुटाना नहीं, बल्कि बिखरे हुए संगठन को एकजुट कर जमीन पर सक्रिय करना होगा।
स्वागत कार्यक्रम में दिखाई दिया उत्साह निश्चित रूप से कांग्रेस के लिए सकारात्मक तस्वीर पेश करने का प्रयास था, लेकिन रैली के दौरान सामने आई गुटबाजी ने उस तस्वीर पर सवाल भी खड़े कर दिए। अपने-अपने नेताओं के समर्थन में नारे और अलग-अलग समूहों में दिखाई देते कार्यकर्ता इस बात का संकेत देते हैं कि कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और संगठन को लेकर खींचतान अभी समाप्त नहीं हुई है।
भाजपा का स्पष्ट मानना है कि केवल प्रदेश प्रभारी के दौरे और स्वागत कार्यक्रमों से संगठन मजबूत नहीं होता। इसके लिए कार्यकर्ताओं के बीच विश्वास, नेतृत्व में समन्वय और बूथ स्तर तक मजबूत संगठनात्मक ढांचा जरूरी है।
अब देखना होगा कि प्रदेश प्रभारी सुखदेव भगत दंतेवाड़ा कांग्रेस की इस अंदरूनी खींचतान को दूर कर पाते हैं या उनका यह प्रवास भी कांग्रेस के अन्य राजनीतिक दौरों की तरह केवल स्वागत और नारों तक सीमित रह जाता है।







