बलरामपुर संवाददाता युसूफ खान
17 चेकडैम निर्माण कार्यों का भुगतान रोका, जिम्मेदार अधिकारियों से भी मांगा जवाब; गुणवत्ता से खिलवाड़ करने वालों पर प्रशासन की सख्ती
कुसमी /बलरामपुर/ जिले में विकास कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। चेकडैम निर्माण कार्यों में तकनीकी खामियां, गुणवत्ता में कमी और अधिक मूल्यांकन की अनियमितता सामने आने के बाद कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी ने जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। प्रशासन की इस कार्रवाई से स्पष्ट संदेश गया है कि सरकारी राशि से होने वाले निर्माण कार्यों में लापरवाही और अनियमितता किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
चेकडैम निर्माण में मिली गड़बड़ियों के मामले में जनपद पंचायत राजपुर में पदस्थ तकनीकी सहायक रोहित कुमार की संविदा सेवा 30 अक्टूबर 2026 को जारी कार्यालयीन आदेश के माध्यम से समाप्त कर दी गई है। वहीं तकनीकी सहायक रोहित कुमार, अविनाश भारती एवं कृपाशंकर गुप्ता से कुल 9.13 लाख रुपये की वसूली के निर्देश जारी किए गए हैं। इसके अलावा जांच के दायरे में आए सभी 17 चेकडैम निर्माण कार्यों का भुगतान रोक दिया गया है। जिला प्रशासन की इस कार्रवाई को निर्माण कार्यों में गुणवत्ता, जवाबदेही और सरकारी धन के उचित उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

समाचारों के बाद प्रशासन ने कराई तकनीकी जांच
दरअसल, 12 मार्च 2026 को विभिन्न समाचार पत्रों में चेकडैम निर्माण की गुणवत्ता को लेकर खबरें प्रकाशित हुई थीं। प्रशासन ने इन खबरों को गंभीरता से लेते हुए राज्य कार्यालय के निर्देश पर मुख्य तकनीकी परीक्षक (सतर्कता) से जिले में निर्मित 17 चेकडैम कार्यों की जांच कराई। जांच प्रतिवेदन में कुछ निर्माण कार्यों में कंक्रीट की गुणवत्ता तथा उप-संरचनाओं के निर्माण में तकनीकी कमियां पाई गईं। इसके साथ ही कंक्रीट की सतह पर प्लास्टर किए जाने और कार्यों का अधिक मूल्यांकन किए जाने का भी उल्लेख किया गया।
17 निर्माण कार्यों का भुगतान रोका, जिम्मेदारी तय
जांच में सामने आई अनियमितताओं के आधार पर प्रशासन ने सभी 17 चेकडैम निर्माण कार्यों का भुगतान रोकने का निर्णय लिया है। इनमें 12 कार्य ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग बलरामपुर तथा 5 कार्य जनपद पंचायत राजपुर के अंतर्गत शामिल हैं। इस कार्रवाई का उद्देश्य निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और तकनीकी मानकों की जांच सुनिश्चित करना तथा सरकारी धन के उपयोग में पारदर्शिता बनाए रखना है।
अन्य तकनीकी सहायकों पर भी कार्रवाई
प्रशासन ने तकनीकी सहायक अविनाश भारती एवं कृपाशंकर गुप्ता पर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 की धारा 25 के तहत एक-एक हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। दोनों को अंतिम चेतावनी पत्र भी जारी किया गया है। वहीं रोहित कुमार की संविदा सेवा समाप्त करने के साथ संबंधित कर्मचारियों से वसूली की कार्रवाई भी शुरू की गई है।
वरिष्ठ अधिकारियों से भी मांगा जवाब
निर्माण कार्यों में पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी तय करते हुए ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग बलरामपुर के कार्यपालन अभियंता श्री सच्चिदानंद कांत तथा उप संभाग राजपुर के अनुविभागीय अधिकारी श्री जानूराम सोनवानी को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया गया है। इसके अलावा जनपद पंचायत राजपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री संजय दुबे एवं कार्यक्रम अधिकारी श्री मानसाय सिदार से भी जवाब तलब किया गया है। इससे स्पष्ट है कि प्रशासन ने केवल मैदानी स्तर पर ही नहीं, बल्कि निगरानी और पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारियों की जवाबदेही भी निर्धारित की है।
कलेक्टर का स्पष्ट संदेश- विकास कार्यों में गुणवत्ता सर्वोपरि
कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. आशुतोष चतुर्वेदी ने स्पष्ट किया है कि जिले में किसी भी योजना अथवा मद से कराए जाने वाले निर्माण कार्यों में निर्धारित गुणवत्ता मानकों का पालन अनिवार्य है। विकास कार्यों की नियमित निगरानी की जाएगी और लापरवाही या अनियमितता पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जवाबदेही तय करते हुए नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन की प्राथमिकता केवल निर्माण कार्यों को पूरा कराना नहीं, बल्कि ऐसी मजबूत और टिकाऊ परिसंपत्तियों का निर्माण करना है, जिनका लाभ ग्रामीणों को लंबे समय तक मिल सके। चेकडैम जैसे जल संरक्षण से जुड़े निर्माण कार्य ग्रामीण क्षेत्रों में जल संचयन और कृषि गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे में इनकी गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता सीधे ग्रामीण हितों को प्रभावित कर सकता है।
जिला प्रशासन की इस कार्रवाई से सरकारी निर्माण कार्यों में पारदर्शिता, तकनीकी गुणवत्ता और जवाबदेही को लेकर सख्त संदेश गया है। साथ ही यह भी स्पष्ट हुआ है कि विकास कार्यों में केवल स्वीकृति और निर्माण ही नहीं, बल्कि उनकी गुणवत्ता और टिकाऊपन भी प्रशासन की प्राथमिकता में शामिल है।







