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पीपल के पत्तों पर उकेरी छत्तीसगढ़ की संस्कृति, विकास शांडिल्य की अनोखी कलाकृति

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संवाददाता – खिलेश नाग
नगरी। छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर नगरी क्षेत्र अंतर्गत ग्राम मोदे निवासी कलाकार विकास शांडिल्य ने अपनी अनोखी कलाकृति के माध्यम से छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोककला एवं आदिवासी संस्कृति को खूबसूरती से प्रदर्शित किया है। उन्होंने पीपल के पत्तों पर छत्तीसगढ़ की आकृति एवं नक्शा उकेरकर उसके भीतर गोंड कला शैली में विभिन्न आकर्षक आकृतियों को जीवंत रूप दिया है।
इस कलाकृति में तीन प्रमुख दृश्यों को दर्शाया गया है। पहली आकृति में शहनाई की मधुर धुन बजाते हुए कलाकार को प्रदर्शित किया गया है। दूसरी आकृति में ढोल की थाप के माध्यम से छत्तीसगढ़ की पारंपरिक संगीत संस्कृति को दर्शाया गया है। वहीं तीसरी आकृति में आदिवासी लोकनृत्य, संस्कृति और पारंपरिक वेशभूषा की झलक दिखाई गई है।
कलाकार विकास शांडिल्य का यह अनूठा प्रयास छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत, लोकपरंपराओं और आदिवासी जीवनशैली को कला के माध्यम से संरक्षित एवं प्रचारित करने का सुंदर संदेश देता है। पीपल के पत्तों पर इतनी बारीकी से तैयार की गई यह कलाकृति कला के प्रति उनकी रचनात्मक सोच और छत्तीसगढ़ की संस्कृति के प्रति उनके लगाव को दर्शाती है।

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