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केरल के वायनाड में बड़ा हादसा: टनल प्रोजेक्ट साइट पर भारी भूस्खलन, मलबे में दबे कई लोग, राहत और बचाव कार्य जारी

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संवाददाता – रघुराज
केरल से इस वक्त की बेहद दुखद और बड़ी खबर सामने आ रही है। भारी मानसूनी बारिश के बीच केरल के पहाड़ी जिले वायनाड में एक बार फिर प्रकृति और मानवीय लापरवाही का भयानक रूप देखने को मिला है। वायनाड जिले के मेप्पाडी के पास कल्लाडी में चल रहे एक बड़े टनल (सुरंग) रोड प्रोजेक्ट साइट पर अचानक एक भीषण भूस्खलन हुआ है। इस हादसे में भारी मात्रा में खुदाई की गई मिट्टी और मलबे का पहाड़ नीचे खड़े वाहनों, अस्थाई वर्कस्टेशन और वहां काम कर रहे लोगों पर आ गिरा। शुरुआती जानकारी के मुताबिक इस हादसे में अब तक चार लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि लगभग नौ से दस लोग गंभीर रूप से घायल हैं। मलबे के नीचे अभी भी पांच से छह लोगों के दबे होने की आशंका है, जिन्हें निकालने के लिए रेस्क्यू टीमें युद्ध स्तर पर काम कर रही हैं।
यह हादसा मंगलवार सुबह करीब 11:00 से 11:30 बजे के बीच कल्लाडी में मीनाक्षी ब्रिज के पास हुआ। यहाँ अनाक्कमपोयिल-कल्लाडी-मेप्पाडी को जोड़ने वाले ट्विन-टनल प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य चल रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण वहां जमा की गई मिट्टी अचानक ताश के पत्तों की तरह ढह गई। मलबे का बहाव इतना तेज था कि वह किसी बर्फीले तूफान की तरह आया और पलक झपकते ही सब कुछ अपनी चपेट में ले लिया। घटना के वक्त वहां कई इंजीनियर्स, सुपरवाइजर और मजदूर काम कर रहे थे। मलबे की चपेट में आने से मजदूरों को ले जाने वाली एक निजी बस भी पास की नदी में बह गई और आधी डूब गई।
प्रशासन ने इस घटना पर तुरंत एक्शन लेते हुए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ), स्थानीय पुलिस, फायर सर्विस और स्वास्थ्य विभागों को मौके पर तैनात कर दिया है। मलबे को हटाने के लिए कई बड़ी जेसीबी और पोकलैंड मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके साथ ही मलबे में दबे लोगों का पता लगाने के लिए राज्य पुलिस के खोजी कुत्तों (स्निफर डॉग्स) की भी मदद ली जा रही है। हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोगों ने सूझबूझ दिखाते हुए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया और कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। घायलों को तुरंत पास के मेप्पाडी विम्स अस्पताल और कम्युनिटी हेल्थ सेंटर में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों की विशेष टीम उनका इलाज कर रही है। घायलों में एक स्थानीय पुलिस सब-इंस्पेक्टर और एक महिला भी शामिल है जो बचाव कार्य के दौरान मदद करने पहुंचे थे।
इस भीषण हादसे के बाद केरल सरकार और स्थानीय मंत्रियों ने निर्माण कंपनी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री टी सिद्दीकी ने इस घटना को प्राकृतिक आपदा मानने से इनकार करते हुए इसे पूरी तरह से एक मानव-निर्मित आपदा यानी मैन-मेड डिजास्टर करार दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस टनल प्रोजेक्ट की खुदाई से निकली मिट्टी और पत्थरों को साइट पर बहुत ही असुरक्षित तरीके से जमा करके रखा गया था। जिला प्रशासन और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने मानसून शुरू होने से पहले ही कंपनी को कड़ी चेतावनी जारी की थी। पिछले 20 जून को जिला कलेक्टर ने कंपनी को इस मिट्टी को वहां से हटाने का सख्त आदेश दिया था, और 25 जून को हुई समीक्षा बैठक में भी इसके खतरों से आगाह किया गया था। लेकिन कंपनी और ठेकेदारों ने इन चेतावनियों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया, जिसका नतीजा आज इस दर्दनाक हादसे के रूप में सामने आया है। सरकार ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं ताकि दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सके। वहीं दूसरी तरफ, निर्माण कंपनी ने अपने बयान में कहा है कि वे सभी सुरक्षा मानकों का पालन कर रहे थे और पिछले 24 घंटों में वहां लगभग 265 मिलीमीटर की असाधारण बारिश हुई है, जो इस भूस्खलन का मुख्य कारण बनी।
हादसे की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने कल्लाडी और आसपास के इलाकों में रहने वाले परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करना शुरू कर दिया है। अब तक 42 परिवारों के लगभग 142 लोगों को मेप्पाडी पॉलिटेक्निक कॉलेज में बनाए गए राहत शिविर में पहुंचाया जा चुका है। मौसम विभाग ने वायनाड और पड़ोसी जिले कोझिकोड में बेहद भारी बारिश की आशंका को देखते हुए रेड अलर्ट जारी किया है। सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन ने मीनाक्षी पुल पर यातायात को पूरी तरह से रोक दिया है और पीडब्ल्यूडी को इस पुल की मजबूती की जांच करने के निर्देश दिए हैं। भारी बारिश और खराब मौसम के चलते वायनाड के सभी स्कूल-कॉलेजों और शैक्षणिक संस्थानों में छुट्टी घोषित कर दी गई है। इस दुखद घटना पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और वायनाड की सांसद प्रियंका गांधी वाडरा ने भी गहरा दुख व्यक्त किया है और अपनी संवेदनाएं प्रकट की हैं। उन्होंने कांग्रेस और यूडीएफ के सभी कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर राहत और बचाव कार्यों में हर संभव मदद पहुंचाएं। कल्लाडी का यह इलाका साल 2024 में हुए मुंडक्कई और चूरलमाला के भीषण भूस्खलन वाले क्षेत्र के काफी करीब है, जिससे स्थानीय लोगों में डर और चिंता का माहौल बना हुआ है। लगातार हो रही बारिश और कीचड़ के कारण रेस्क्यू टीमों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन लापता लोगों को ढूंढने का प्रयास लगातार जारी है।

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