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रायपुर मर्डर केस: युवक की हत्या कर नदी में दफनाई लाश, भाजपा पार्षद समेत 4 आरोपी गिरफ्तार

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रघुराज –

रायपुर के मंदिर हसौद इलाके से एक दिल दहला देने वाला सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां एक 38 वर्षीय युवक भुवनेश्वर यादव की बेहद बेरहमी से हत्या कर दी गई और साक्ष्य छिपाने के लिए उसकी लाश को महासमुंद जिले के नान गांव में एक नदी के पास दफना दिया गया। इस पूरे हत्याकांड का मुख्य आरोपी कोई और नहीं बल्कि मृतक का बचपन का दोस्त और स्थानीय भाजपा पार्षद गोलू रात्रे (नोहर रात्रे) है। पुलिस ने इस मामले में भाजपा पार्षद समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और उनकी निशानदेही पर नदी से खोदकर लाश को बाहर निकाला गया है। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में भारी आक्रोश और शोक का माहौल है, जिसके चलते पीड़ित परिवार और स्थानीय लोगों ने थाने का घेराव भी किया।

लापता होने की कहानी और आखिरी फोन कॉल

मृतक भुवनेश्वर यादव के परिजनों के अनुसार, वह 22 मई से रहस्यमय परिस्थितियों में लापता था। 21 मई को वह काम पर गया था और रात को वापस लौटा। इसके बाद 22 मई को वह दिनभर घर पर ही मौजूद था। रात को लगभग 7:00 बजे वह घर से बाहर निकला और कुछ दोस्तों के साथ एक ढाबे पर बैठा। रात करीब 9:00 बजे वह अपने बचपन के दोस्त और स्थानीय पार्षद गोलू रात्रे के ठिकाने पर गया। भुवनेश्वर के परिजनों ने बताया कि इलाके में बोर और पानी का टैंकर खराब हो गया था, जिसके चलते वह पानी की समस्या के विषय में बात करने पार्षद के पास गया था। रात को जब भुवनेश्वर की पत्नी ने उसे फोन किया, तो उसने बताया कि वह पार्षद के पास बैठा है और पानी की समस्या को लेकर बात कर रहा है। उस समय पार्षद ने खुद फोन पर बात करते हुए आश्वासन दिया था कि कल से पानी का टैंकर समय पर पहुंच जाएगा। इसके बाद रात 10:00 बजे तक उनसे आखिरी बार बात हुई।

लापरवाही और गुमराह करने की साजिश

जब रात के 11 से 12 बज गए और भुवनेश्वर घर नहीं लौटा, तो परिजनों ने फिर से उसके फोन पर संपर्क करने की कोशिश की। उस समय उसका फोन पुलिस वालों ने उठाया। पुलिस ने परिजनों को बताया कि उन्हें भुवनेश्वर की गाड़ी, चाबी और मोबाइल लावारिस हालत में मिले हैं, जिसे वे थाने ले आए हैं। परिजनों का आरोप है कि हत्या करने के बाद मुख्य आरोपी पार्षद गोलू रात्रे ने बेहद शातिर तरीके से पूरे परिवार को गुमराह करने की साजिश रची। हत्या को अंजाम देने के बाद वह खुद को बेकसूर दिखाने के लिए भुवनेश्वर को ढूंढने का नाटक कर रहा था। उसने भुवनेश्वर की पत्नी और परिजनों को झांसे में लिया और कहा कि वह एक ऐसे बैगा (तांत्रिक) को जानता है जो खोए हुए लोगों का तुरंत पता लगा देता है। वह परिजनों को अपनी ही गाड़ी में बैठाकर उस तांत्रिक के पास ले गया ताकि किसी को उस पर शक न हो। वहां तांत्रिक ने परिजनों से कहा कि किसी ने जादू-टोना करके उसे छुपा दिया है और वह गुरुवार तक मिल जाएगा। परिजनों का कहना है कि आरोपी ने हत्या करने के बाद भी हमदर्दी जताने और मामले को भटकाने के लिए यह पूरा ढोंग रचा था।

पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप

इस पूरे मामले में मृतक के परिजनों ने स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर लापरवाही बरतने के आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि पुलिस ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करने के बाद जांच में कोई तत्परता नहीं दिखाई। उनका कहना है कि यदि इलाके में कहीं ताश खेलने या छोटा-मोटा झगड़ा होने की बात हो, तो पुलिस की गाड़ी तुरंत पहुंच जाती है, लेकिन इतनी बड़ी घटना होने, एक मासूम की जान चले जाने और पूरा परिवार बिखर जाने के बावजूद पुलिस का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी उनके घर सांत्वना देने या सही तरीके से पूछताछ करने नहीं आया। परिजनों के अनुसार, पुलिस की 100 प्रतिशत लापरवाही रही है और अगर शुरुआत से ही कड़ाई से जांच की जाती, तो मामला जल्दी सुलझ सकता था।

आरोपियों की गिरफ्तारी और पुलिस का बयान

मामले के तूल पकड़ने और परिजनों द्वारा थाने का घेराव किए जाने के बाद पुलिस हरकत में आई। पुलिस ने संदेहियों को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की, जिसके बाद पूरे हत्याकांड का खुलासा हुआ। आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल करते हुए बताया कि उन्होंने भुवनेश्वर की हत्या कर लाश को महासमुंद जिले के नदी क्षेत्र में दफना दिया था। पुलिस की एक विशेष टीम परिजनों को साथ लेकर महासमुंद रवाना हुई और आरोपियों की निशानदेही पर नदी से शव को सम्मानपूर्वक खोदकर बाहर निकाला गया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मृतक भुवनेश्वर यादव की गुमशुदगी का मामला पहले दर्ज किया गया था और विभिन्न पहलुओं पर जांच की जा रही थी। संदेहियों से मिली जानकारी के आधार पर अग्रिम वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। इस मामले में गिरफ्तार मुख्य आरोपी गोलू रात्रे पहले निर्दलीय पार्षद था, जो बाद में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गया था।

इलाके में आक्रोश और न्याय की मांग

इस दर्दनाक और विश्वासघाती घटना से पूरे मंदिर हसौद इलाके में भारी आक्रोश व्याप्त है। जिस दोस्त के साथ मृतक बचपन से पला-बढ़ा, उसी ने इतनी बेरहमी से इस गंभीर साजिश को अंजाम दिया, इस बात से स्थानीय लोग स्तब्ध हैं। पीड़ित परिवार पूरी तरह टूट चुका है और उनका रो-रोकर बुरा हाल है। परिजनों और क्षेत्र की जनता ने पुलिस प्रशासन और सरकार से मांग की है कि इस जघन्य हत्याकांड के सभी दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए और उन्हें ऐसी कड़ी सजा दी जाए जो समाज में एक मिसाल बने ताकि भविष्य में कोई भी ऐसा दुस्साहस करने की हिम्मत न कर सके। फिलहाल पुलिस मामले के अन्य पहलुओं और हत्या के वास्तविक कारणों की गहराई से जांच कर रही है।

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